उत्तराखंडदेश

त्रिवेंद्र रावत सरकार के पक्ष में खड़ा हुआ शिक्षक समाज, social media में दिया AAP को करारा जवाब

देहरादून। उत्तराखंड में 2022 का विधान सभा चुनाव लड़ने ऐलान कर चुकी आम आदमी पार्टी के ऐलान से जहां इन दिनों भाजपा और कांग्रेस भी असहज सी नजर आर रही है,और दोनों राष्ट्रीय पार्टियां आप पार्टी को चुनौति के रूप में अंदरखाने स्वीकार भी कर रही है। लेकिन लगता है आम आदमी पार्टी कुछ ज्यादा ही उत्साह में उत्तराखंड में नजर आ रही है,और यही उत्साह उसका भारी पड़ सकता है। दिल्ली में भले ही आम आदमी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार हो और जनता के मुदों को लपकर आप ने सरकार भी बना ली हो,लेकिन दिल्ली के मुदों की तुलाना उत्तराखंड में कराना आप पार्टी को भारी भरी पड़ सकता है। कुछ दिनों पहले दिल्ली में जहां आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के कूड़े के ढेर की तुलना उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा देवी के पर्वत से कर दी थी,जिसको लेकर आम आदमी पार्टी की काफी आलोचना भी उत्तराखंड में हुई थी,वहीं एक और मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। और वोटों के लिहाज से अगर उस तबके आलोचनाओं पर गौर फरमाएं तो आप के सारे सियासी समीकरण उत्तराखंड में चुनाव लड़ने के भारी पड़ जाएंगे। जी हां हम बात कर रहे है उत्तराखंड के सबसे बड़े विभाग शिक्षा विभाग की जिसमें प्रदेश के सबसे ज्यादा कर्मचारी काम करते है,लेकिन अपने चुनाव लड़ने के शुरूवाती दौर में आप पार्टी उत्तराखंड के शिक्षकों के निशाने पर आ गई। जिसको लेकर आम आदमी पार्टी को लेकर शिक्षकों रोष देखने को मिल रहा है।

वायरल विडियों को लेकर शिक्षकों में रोष

उत्तराखंड के शिक्षकों में आम आदमी पार्टी के खिलाफ रोष उस विडियों को लेकर देखने को मिल रहा है,जिसे उत्तराखंड आम आदमी पार्टी ने अपने फेस बुक फेज पर शेयर किया है। दरअसल आम आदमी पार्टी ने फेसबुक पर उत्तराखंड के एक स्कूल की तुलना दिल्ली के स्कूल से की है। जिसमें आम आमदी पार्टी ने उत्तराखंड के सरकारी को स्कलों की पोल खोलने का काम किया है। रामनगर के एक प्राथमिक विद्यालय से आप पार्टी ने उत्तराखंड के स्कूलों में नशा और जुआ खेलने का संदेश दिया,जो खूब शेयर भी हो रहा है। लेकिन एक प्राथमिक स्कूल से उत्तराखंड के सारे स्कूलों को नशा और जुवे का अड्डा बताना उत्तराखंड के शिक्षकों को अखरने लगा है। अब उत्तराखंड के शिक्षक इसी विडियों को शेयर कर अपना रोष भी व्यक्त भी कर रही है। कई शिक्षक आम आदमी पाार्टी के इस विडियों को आम आदमी पार्टी की घटिया सोच बा रहे है। तो कई शिक्षकों ने उत्तराखंड के उन स्कूलों की भी फोटों शेयर है जो फोटों से ही ऐसे प्रतिति होते है जैस देवभूमि के इन स्कूलों में साक्षात सरस्वती देवभूमि के इन स्कूलों में निवास कतरी होंगे।

शिक्षक कह रहे है कि आम आमदी पार्टी को उन स्कूलों की भी दशा दिखानी चाहिए, जिन स्कूलों के हालत दिल्ली के कई सरकारी स्कूलों से ज्यादा बेहतर है।

कई शिक्षक लिखते है कि दिल्ली सरकार ने एक दो स्कूलों को चमाकार देश में ऐसा प्रचारित – प्रसारित कर दिया है,जैसे दिल्ली के सारे स्कूल ऐसे की सुविधाजन हो।

कई शिक्षक तो यहां तक लिखते है कि उत्तराखंड के कई स्कूलों से खराब हालत दिल्ली के कई सरकारी स्कलों की है। जबकि कुछ लोग लिखते है कि आप पार्टी ने उत्तराखंड के सरकारी स्कूल की तुलना दिल्ली के सीबीएसई बोर्ड के स्कूल से की है जो गलत है।

आप के लिए सबक

हम ये तो नहीं कह रहे है कि आप पार्टी उत्तराखंड कि शिक्षा व्यवस्था की पोल न खोले लेकिन दो बाते हम उत्तराखंड में नई नवेली आम आदमी पार्टी से जरूर कहना चाहते है कि जो विडियों उत्तराखंड और दिल्ली के सरकारी स्कूल की तुलना कि गई है उसमे उत्तराखंड के स्कूल के नाम का जिक्र तो किया गया है, लेकिन दिल्ली के उस स्कूल का जिक्र नहीं किया गया है जो तुलनात्मक रूप से डाला गया है। कई शिक्षक जो ये बात कह रहे है वह सीबीएसई बोर्ड का स्कूल है, जिसकी जिसकी तुलना उत्तराखंड के एक स्कूल से की गई है तो इसका जवाब भी उत्तराखंड आम आदमी पार्टी को देना होगा कि वह दिल्ली का कौन सा सरकारी स्कूल है जिसकी तुलना की गई है,साथ ही उत्तराखंड के एक स्कूल का विडियों डालकर आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड के सारे स्कूलों में नशा खोरी और जुआ खेलने का संदेश दिया है,जो कि बेहद गलत है, हम ये दावे के साथ कह सकते है कि उत्तराखंड के कुछ स्कूलों को छोड़कर प्रदेश के कई स्कूल आज बेहतर स्थिति में है,विषमभौगोलिक परिस्थियों के होने के वाबजूद उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक बेहतर शिक्षा देश के कई राज्यों के शिक्षकों से बेहतर देते होंगे, । आप पार्टी राजनीति में आकर जरूर ये कह सकती है कि उनकी सरकार आने के बाद सरकारी स्कूलों में क्या बदलाव होगे। लेकिन सारे स्कूल को नशा और जूवे का अड्डा बताना आप पार्टी को सियासी नुकसान भी पहुंचा सकता है। क्योंकि ये उत्तराखंड में कहावत है कि उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों का जुकाव जिस तरह होता है वहीं पार्टी उत्तराखंड में सरकार बनाती है,और अगर आप पार्टी उत्तराखंड के सबसे बड़े विभाग के कर्मचारियों से ही विरोध मोल ले, ले तो फिर पार्टी को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

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