उत्तराखंड

कोरोनाकाल में डॉक्टर देंगे सामूहिक इस्तीफ़ा, एक सितम्बर से सात सितम्बर तक काली पट्टी बांध कर करेंगे विरोध

उत्तराखंड प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ के बैनर तले कोरोनाकाल में चिकित्सक सामूहिक इस्तीफ़ा देने की तैयारी में है। संघ की आयोजित बैठक में डॉक्टरों की तीन प्रमुख मांगों पर कार्रवाई न होने पर आंदोलन का एलान कर दिया गया है। जिसके कार्यक्रमअनुसार एक से सात सितंबर तक प्रदेश भर में डॉक्टर काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्ज करेंगे। साथ ही अगर फिर भी उनकी माँगो पर शासन या सरकार की तरफ़ से कोई सकारात्मक फ़ैसला नहीं होता तो फिर आठ सितंबर को डॉक्टर वीआरएस और सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। राजधानी देहरादून के गांधी शताब्दी चिकित्सालय के सभागार में हुई प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ की बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति बनाई गई है। बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. नरेश नपलच्याल ने कहा कि कोरोना काल में चिकित्सक न सिर्फ अपनी बल्कि परिवार को छोड़कर  पूरी ईमानदारी से ड्यूटी कर रहे हैं।  इसके बाद भी डॉक्टरों की मांगों की अनदेखी सरकार की तरफ़ से की जा रही है। कोरोना से जंग लड़ रहे डॉक्टरों को अन्य राज्यों में प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। वहीं, उल्टा उत्तराखंड में डॉक्टरों से हर माह एक दिन का वेतन काटा जा रहा है। पिछले वर्ष संघ के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री ने पीजी कर रहे डॉक्टरों को नियमित डॉक्टरों की तरह पूरा वेतन देने की घोषणा की थी। जिसका कोई संज्ञान आज तक नहीं लिया गया है। वहीं सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक हस्तक्षेप लगातार किया जा रहा है। संघ का कहना है कि सभी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के काम करने के घंटे तय है। लेकिन डॉक्टर चौबीस घंटे की सेवाएं दे रहे हैं। संघ ने एलान किया कि एक से सात सितंबर तक पूरे प्रदेश के डॉक्टर काली पट्टी बांध कर विरोध करेंगे। यदि सरकार मांगे नहीं मानती है तो आठ सितंबर को डॉक्टर वीआरएस लेंगे और सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे।

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