उत्तराखंड

भाजपा में सिटिंग विधायकों का कट सकता है टिकट

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को महज डेढ़ साल का ही वक्त बाकी है, वहीं भाजपा पार्टी पर पिछले चुनाव का प्रदर्शन दोहराने का भारी दबाव भी है या कहें तो चुनौती है। यही वजह है कि त्रिवेंद्र रावत  सरकार और भाजपा संगठन किसी भी स्तर पर कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं। इसी को देखते हुए अब पार्टी ने अपने विधायकों की परफार्मेस के आकलन का इरादा जाहिर किया है। इसका मतलब यह हुआ कि कौन विधायक अपने क्षेत्र में कितना सक्रिय रहा और उसकी मतदाताओं पर पकड़ कितनी मजबूत है, पार्टी संगठन इसका ब्योरा एकत्र करेगा। इसके अलावा भी कई अन्य पैमानों पर विधायकों को खरा उतरना होगा। पार्टी के इस फैसले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पहले भी भाजपा विधानसभा चुनावों में अपने सिटिंग विधायकों के टिकट अलग-अलग कारणों से काट चुकी है।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी समय समय पर अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित कर साफ कह चुके है कि चुनाव में केवल डेढ़ साल का वक़्त बचा है।इसलिए कार्यकर्ता सब मिल कर के एक हो जाये।यानी कि माना जा सकता है उत्तराखंड बीजेपी अभी से चुनावी मोड़ में आ चुकीं है। जिसकी शुरुआत पार्टी अपने सिटिंग विधायकों की परफॉर्मेंस का आँकलन करने से करने जा रही है।


भाजपा सभी विधायकों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी और उसी के आधार पर विधायकों की परफॉर्मेंस देखी जाएगी. अगर किसी विधायक की परफॉर्मेंस ठीक नहीं होती है तो उसे अलर्ट किया जाएगा ताकि वह इसे सुधार सके.मगर उसके बाद भी रिपोर्ट कार्ड ठीक नहीं होता तो पार्टी हाईकमान देखेगा कि आगे क्या करना है.वरना किसी अन्य कार्यकर्ता पर दांव खेला सकती है।जो पार्टी को 2022 में जीत दिला सके।ऐसे में पार्टी ने साफ कर दिया है कि वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हीं विधायकों को फिर टिकट दिया जाएगा, जो परफार्मेस के पैमाने पर खरा उतरेंगे।

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