उत्तराखंड

सार्वजनिक जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और पारस्परिक सम्मान की एक अद्वितीय मिसाल, जनरल खंडूरी और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का वैचारिक जुड़ाव

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर देश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गहरा शोक व्याप्त है। इस दुखद अवसर पर देश के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन का दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने विशेष रूप से देहरादून आगमन, सार्वजनिक जीवन में उच्च मानदंडों, कर्तव्यनिष्ठा और पारस्परिक सम्मान के एक महत्वपूर्ण अध्याय को रेखांकित करता है। दोनों नेताओं के मध्य यह वैचारिक और प्रशासनिक जुड़ाव दशकों पुराना था, जो समय के साथ निरंतर सुदृढ़ होता गया। इस दीर्घकालिक संबंध की पृष्ठभूमि उस समय की है जब श्री सीपी राधाकृष्णन संसद सदस्य के रूप में कार्यरत थे और मेजर जनरल बी.सी. खंडूरी केंद्र सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री के रूप में दायित्व संभाल रहे थे। उस कालखंड में, श्री राधाकृष्णन के संसदीय क्षेत्र की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक सड़क परियोजनाओं को जनरल खंडूरी के कार्यकाल के दौरान स्वीकृति प्राप्त हुई थी। जनरल खंडूरी ने अपनी विशिष्ट सैन्य कार्यशैली, पूर्ण पारदर्शिता और त्वरित प्रशासनिक निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए उन जनोपयोगी सड़क परियोजनाओं को न केवल गति दी, बल्कि उनका समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित कराया। जनरल खंडूरी की इसी निष्पक्षता, नीतिगत स्पष्टता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता ने श्री राधाकृष्णन को अत्यंत प्रभावित किया। राजनीति और दलगत सीमाओं से परे, जनरल खंडूरी की इस प्रशासनिक सुचिता ने उनके प्रति एक स्थायी सम्मान का भाव जागृत किया, जो आगामी दशकों में भी निरंतर बना रहा। श्री राधाकृष्णन ने विभिन्न उच्च संवैधानिक पदों पर रहते हुए भी इस वरिष्ठ नेता के प्रति सदैव आदर भाव बनाए रखा।
इस पारस्परिक सम्मान की एक प्रत्यक्ष बानगी लगभग एक माह पूर्व भी देखने को मिली थी, जब माननीय उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन देहरादून के आधिकारिक प्रवास पर थे। अपने व्यस्त कार्यक्रमों के मध्य उन्होंने उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी से भेंट के दौरान जनरल खंडूरी के स्वास्थ्य के विषय में जानकारी ली। जब माननीय राज्यपाल ने उन्हें अवगत कराया कि जनरल खंडूरी अस्वस्थ हैं और चिकित्सालय में उपचाराधीन हैं, तब माननीय उपराष्ट्रपति जी ने अपने राजकीय कार्यक्रमों के मध्य समय निकाला और स्वयं चिकित्सालय में उनसे भेंट करने पहुंचे। चिकित्सालय में हुई वह भेंट दोनों नेताओं के बीच के उसी गहरे ऐतिहासिक और वैचारिक संबंधों का प्रकटीकरण थी। कल जब जनरल खंडूरी के महाप्रयाण का समाचार प्राप्त हुआ, तब माननीय उपराष्ट्रपति जी पुनः माननीय राज्यपाल के साथ दिवंगत आत्मा को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने देहरादून पहुंचे। यह संपूर्ण घटनाक्रम वर्तमान और आगामी पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों के लिए एक उत्कृष्ट दृष्टांत है। यह इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए लिए गए जनहित के निर्णय, पारदर्शिता और ईमानदारी केवल तात्कालिक विकास नहीं करते, बल्कि सार्वजनिक जीवन में अमिट सम्मान और स्थायी संबंधों का निर्माण करते हैं। पद और उत्तरदायित्व समय के साथ बदलते रहते हैं, किंतु एक जनसेवक की शुचिता और उसकी कार्यप्रणाली जनमानस एवं सहयोगियों के मानस पटल पर सदैव जीवंत रहती है। माननीय राज्यपाल ने भी दोनों विभूतियों के इस गौरवशाली समन्वय और मूल्य-आधारित जुड़ाव की सराहना की है। जनरल खंडूरी का संपूर्ण जीवन और उनके द्वारा स्थापित किए गए उच्च मानदंड सदैव अनुकरणीय रहेंगे।

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