Thursday, April 23, 2026
उत्तराखंड

अब यूपीसीएल में अधिकारी ही कर रहे प्रबंधन के नियमों को बायपास, क्या बिना विवादों में आए नहीं होता यूपीसीएल में कोई काम ? सूचना के अधिकार से कर्मचारियों ने ही किया नया खुलासा

उत्तराखंड प्रदेश के ऊर्जा विभाग का हर काम सवालों में होता है। फिर चाहे आम जनता को बढ़ती गर्मी से राहत देने के लिए बनाई जा रही व्यवस्था हो या फिर खुद निगम के ही कर्मचारियों को लेकर कोई फैसला लेना हो। बिना किसी हंगामे विवाद के यूपीसीएल में काम पूरा हो जाए तो गनीमत समझो। यूपीसीएल के ऐसे ही एक ताजा मामले में कर्मचारी नेताओं ने नियमों को ताक पर रख कर तबादले करने का आरोप लगाया है। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि मुख्य अभियन्ता (वितरण), गढ़वाल क्षेत्र, 120-हरिद्वार रोड, देहरादून द्वारा निदेशक (मानव संसाधान) यूपीसीएल के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए कार्यालय अधीक्षक द्वितीय के स्थानान्तरण करते हुए उन्हें इच्छित तैनाती दे दी गई है। जिसका खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने पर हुआ है। कार्यालय अधीक्षक द्वितीय का नियुक्ति अधिकारी मानव संसाधन विभाग, ऊर्जा भवन देहरादून है। वहीं कार्यालय अधीक्षक द्वितीय के पद पर मानव संसाधन विभाग द्वारा अभी कुछ समय पहले ही पदोन्तत कर तैनाती दी गई थी। लेकिन मुख्य अभियन्ता (वितरण), गढ़वाल क्षेत्र द्वारा अपने अधिकारों से इतर जाकर कार्यालय अधीक्षक द्वितीय का स्थानान्तरण कर दिया गया। निगम के ही कर्मचारी गंगा सिंह ल्वाल द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत यह सूचना मांगी गई कि कितने कार्यालय अधीक्षकों का स्थानान्तरण मुख्य अभियन्ता (वितरण), गढ़वाल क्षेत्र द्वारा किया गया है और किस नियम के तहत यह स्थानान्तरण किया गया है। इसके उत्तर में यह जानकारी दी गई कि कार्यालय अधीक्षक द्वितीय का स्थानान्तरण बिना किसी उच्चाधिकारी के अनुमति के मुख्य अभियन्ता (वितरण) द्वारा किया गया है। स्थानान्तरण के नियमों के उत्तर में सूचना का शून्य होना अंकित किया गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि मुख्य अभियन्ता (वितरण) द्वारा नियम विरूद्ध स्थानान्तरण की प्रक्रिया सम्पन्न करायी गई है। निगम प्रबंधन की बात हो या फिर खुद सरकार की। विभागो में पारदर्शिता लाने के तमाम दावे किए जाते है। लेकिन चहेतो को एडजस्ट करने के लिए अधिकारी अपने ही बनाए नियमों को भी बाय पास कर रहे है। जिसका खुलासा निगम के ही कर्मचारी सूचना का अधिकार से करते हुए अब कार्यवाही की मांग कर रहे है।

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